Sep 11, 2022
मध्यप्रदेश के दतिया जिले से 17 किलोमीटर दूर उनाव के बालाजी सूर्य मंदिर परिसर में चढ़ावे में चढ़ाए गए घी से कुँए भरे पढ़े हुए है ! यह मन्दिर ऐतिहासिक होने के साथ ही प्राचीन भी है !
बताया जाता है की विगत 50 वर्षों में यहाँ आनेवाले श्रधालुओं के द्वारा यहाँ इतना घी चढ़ाया जा चूका है कि यहाँ इस चढ़ावे में चढ़ाए जानेवाले घी को रखने हेतु कुओं का निर्माण करवाना पड़ा ! वह भी एक या दो कुँए नहीं बल्कि पूरे नौं कुएं !
उनाव में मंदिर की स्थापना सोलहवीं शताब्दी में हुई थी। तब एक चबूतरे पर सूर्य यंत्र स्थापित किया गया था। बाद में झांसी के राजा नारायण राव (नारूशंकर) ने इसे मंदिर का रूप दिया। दतिया के राजा नरेश रावराजा ने सन 1736 से 1762 के बीच मंदिर को भव्य रूप दिया। दतिया स्टेट गजेटियर के अनुसार 1854 में सिंधिया के मंत्री मामा साहब जादव ने मंदिर का और विस्तार कराया। मंदिर के गर्भ गृह के ठीक सामने से पहूज (पुष्पावती) नदी निकली हुई है।ऐसी मान्यता है कि रविवार के दिन नदी में स्नान के बाद मंदिर में सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने से चर्म रोगों से छुटकारा मिलता है। इसी मान्यता के चलते यहां रविवार के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु नदी में स्नान करने के बाद भीगे बदन मंदिर में पहुंचकर श्री यंत्र पर जल अर्पित करते हैं।
बालाजी मंदिर की चार सौ साल पुरानी परंपरा बदल दी गई है। रविवार के दिन मंदिर के गर्भ गृह में स्थापित सूर्य यंत्र पर जल अर्पित करने पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने यह फैसला प्राचीन सूर्य यंत्र को सुरक्षित रखने के लिए लिया है।लगातार जल चढ़ने से पत्थर के प्राचीन सूर्य यंत्र के क्षरण की संभावना है। यह अपना मूल स्वरूप खोता जा रहा है। यंत्र के संरक्षण के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। रविवार को यहां भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिसकी वजह से रविवार को ही गर्भ गृह में प्रवेश निषेध किया गया है। अन्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या कम रहती है। वह गर्भ गृह में पहुंचकर सूर्य यंत्र पर जल अर्पित कर सकते हैं।
इस प्रसिद्ध बालाजी मंदिर के बारे में माना जाता है कि मन्दिर के निकट ही एक पवित्र जलकुण्ड है ! कहा जाता है कि इस जल से स्नान करने पर तमाम दु:ख-दर्द मिट जाते हैं !यहाँ आने वाले नि:संतान दंपत्तियों को संतान का सुख मिलता है ! लगभग चार सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर में संतान की चाहत रखने वाले श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है ! भगवान के दर्शन मात्र से संतान सुख की प्राप्ति हो जाती है !इस स्थान को “बालाजी धाम” के नाम से भी जाना जाता है ! कहा जाता है कि यह प्रसिद्ध मंदिर प्रागैतिहासिक काल का है !पहुँज नदी के किनारे पर आकर्षक और सुरभ्य पहाड़ियों में स्थित इस सूर्य मन्दिर पर सूर्योदय की पहली किरण सीधे मन्दिर के गर्भागृह में स्थित मूर्ति पर पड़ती है ! इस प्राचीन मन्दिर में प्रतिदिन सैंकड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है ! यहाँ आषाढ़ शुक्ल एकादशी को रथयात्रा का आयोजन किया जाता है तथा प्रत्येक रविवार को मेले का आयोजन किया जाता है !