Jun 24, 2017
रानी दुर्गावती को आज बलिदान दिवस के रूप में याद किया जा रहा है। वीरांगना के शहीद स्थल पर शनिवार को मेले का आयोजन किया गया है। जहां बड़ी तादाद में लोग मौजूद है। आपको बता दें कि जबलपुर वह स्थान है जहां पर रानी दुर्गावती ने शत्रुओं का संहार करने के लिए घोड़े पर सवार होकर छलांग लगाई थी और इसी दौरान वीरगति को प्राप्त हुई थी। गोंडवाना की रणचंडी, दुर्गावती भवानी थी। व्यूह रचना में दक्ष साम्राज्ञी ने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए अकबर की सेना को युद्ध के मैदान में तीन बार धूल चटाई थी। जब रानी को लगा कि अब वह युद्ध नहीं जीत सकतीं और घायल हो गईं तो अपनी कटार को अपनी छाती में घुसा कर जान दे दी। 24 जून 1564 रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के रूप में तब से आज तक मनाया जा रहा है। रानी ने शत्रुओं से युद्ध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इतिहासकारों के अनुसार रानी की हार का कारण उनके ही विश्वासपात्र की दगाबाजी थी।
रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर1524 को हुआ था। रानी भारत की एक वीरांगना थीं जिन्होने अपने विवाह के चार वर्ष बाद अपने पति दलपत शाह की असमय मृत्यु के बाद अपने पुत्र वीरनारायण को सिंहासन पर बैठाकर उसके संरक्षक के रूप में स्वयं शासन करना प्रारंभ किया। इनके शासन में राज्य की बहुत उन्नति हुई। दुर्गावती को तीर तथा बंदूक चलाने का अच्छा अभ्यास था। चीते के शिकार में इनकी विशेष रुचि थी। उनके राज्य का नाम गढ़मंडला था जिसका केन्द्र जबलपुर है।








