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बालाघाट में नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर: 77 लाख का इनामी कबीर समेत 10 हार्डकोर नक्सली हुए सरेंडर

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Dec 7, 2025

बालाघाट में नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर: 77 लाख का इनामी कबीर समेत 10 हार्डकोर नक्सली हुए सरेंडर

अमित चौरसिया बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। शनिवार देर रात एक साथ 10 खतरनाक नक्सलियों ने हथियार डाल दिए। इनमें 77 लाख रुपये का इनामी नक्सली कबीर उर्फ महेंद्र भी शामिल है, जो कान्हा-भोरमदेव डिवीजन का सक्रिय कमांडर था। चार महिला और छह पुरुष नक्सलियों ने रात 10 बजे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। यह सरेंडर हालिया मुठभेड़ों और सरकार की सख्त नीति का नतीजा माना जा रहा है।

रात 10 बजे हुआ ऐतिहासिक आत्मसमर्पण

शनिवार रात करीब 10 बजे सभी 10 नक्सलियों ने बालाघाट पुलिस के सामने सरेंडर किया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें पुलिस लाइन लाया गया। फिलहाल उनसे विस्तृत पूछताछ चल रही है। पुलिस के अनुसार सभी नक्सली लंबे समय से छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश सीमा के घने जंगलों में सक्रिय थे।

77 लाख का इनामी कबीर सबसे बड़ा नाम

सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम कबीर उर्फ महेंद्र का है। एमएमसी जोन में उस पर कुल 77 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह केबी डिवीजन का प्रमुख नेता था और कई वारदातों में शामिल रहा। उसके साथ चार महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो पार्टी के अंदर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती थीं।

CM मोहन यादव आज बालाघाट आएंगे

इस ऐतिहासिक सरेंडर को भुनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज दोपहर 3 बजे बालाघाट पहुंच रहे हैं। उनके सामने सभी 10 नक्सलियों द्वारा औपचारिक रूप से हथियार रखे जाएंगे। सरकार इसे नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत के तौर पर पेश करेगी। कार्यक्रम में गृह मंत्री, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

मुठभेड़ और सरेंडर नीति का दबाव काम आया

लांजी थाना क्षेत्र के माहिरखुदरा जंगल में हाल ही में हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद नक्सली खेमे में दहशत फैल गई थी। कई साथी मारे गए, जिससे बचा हुआ ग्रुप टूट गया। इसके साथ ही सरकार की उदार आत्मसमर्पण नीति, लगातार सर्च ऑपरेशन और जंगल में कैंपों की स्थापना ने नक्सलियों पर मानसिक दबाव बनाया। यही कारण है कि एक साथ 10 नक्सलियों ने हथियार डालने का फैसला लिया।

2026 तक नक्सलमुक्त MP का लक्ष्य नजदीक

मध्य प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 तक प्रदेश को पूरी तरह नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस साल अब तक दर्जनों नक्सली या तो मारे जा चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं। एक नवंबर को महिला नक्सली सुनीता के सरेंडर के बाद यह सबसे बड़ा झटका है। सुरक्षा एजेंसियां इसे बालाघाट सहित पूरे बस्तरिया क्षेत्र में नक्सल नेटवर्क के अंत की शुरुआत मान रही हैं।

Report By:
Monika