Aug 3, 2022
मध्य प्रदेश की सियासत में ईडी और एनआईए की एंट्री हो चुकी है। दोनों ही एजेंसियां इन दिनों अपने एक्शन, रेड्स और पॉलिटिकल रिएक्शंस की वजह से चर्चा में है। चुनावी साल में MP कांग्रेस को एनआईए और ईडी के जरिए उसकी फंडिंग और नेताओं को डराने धमकाने का खतरा नज़र आ रहा है। इधर MP बीजेपी इन दोनों एजेंसियों की सक्रियता को प्रदेश के हित में मान रही है।
नरेंद्र मोदी की सरकार में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट और एनआईए की सक्रियता जबरदस्त ढंग से बड़ी है। प्रवर्तन निदेशालय “ईडी” ने जिस तरह से विपक्षी नेताओं के भ्रष्टाचार उजागर किए हैं उसे लेकर मध्यप्रदेश में भी खलबली है। मध्यप्रदेश में ईडी ने इंदौर के बाद भोपाल को अपना कार्यालय बनाया है। वहीं नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एनआईए मध्यप्रदेश में खुद को प्रभावी बनाने के लिए अपना स्थाई कार्यालय खोलने जा रही है। इसके लिए भोपाल में उसके दफ्तर को शुरू करने के लिए जमीन की तलाश भी कर ली गई है।
नरोत्तम मिश्रा का बयान
एक जमाना था जब लोग सीबीआई का नाम सुनते ही डर जाते थे अब वक्त बदल गया है कारोबारियों और भ्रष्टाचारियों को सीबीआई से डर नहीं लगता ईडी से जरूर लगता है। विरोधी दल के राजनेता तो ईडी के खौफ से रात में बुरे सपने भी देखने लगे हैं। इधर एनआईए की सक्रियता मध्यप्रदेश में बढ़ने का कारण एमपी में आतंकी गतिविधियों के नेटवर्क के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेसी ईडी और एनआईए की सक्रियता के पीछे 2023 के विधानसभा चुनाव को जोड़कर देख रही है। कांग्रेस की मानें तो बीजेपी ने विरोधी दलों को सताने और अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ईडी और एनआईए को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की रणनीति बनाई है। इधर बीजेपी नेता दोनों ही एजेंसियों की सक्रियता के सियासी लाभों को देखते हुए खुश नज़र आ रहे हैं।
दोनों ही राष्ट्रीय जांच एजेंसियों की MP में सक्रियता बढ़ने से जनता को क्या आपत्ति हो सकती है। बेनकाब नेता हों या आतंकी, जनता तो खुश ही होती है। बात इतनी है कि ये संस्थाएं सूबे में बीजेपी के निजी एजेंडे की पूर्ती का माध्यम न बन जाए। MP में बढ़ते संगठित आर्थिक अपराध और जगह जगह फ़ैल चुके टेरेरिज्म के जाल को ब्रेक करने में दोनों संस्थाएं क्या नतीजे लाती हैं ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा।








