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बोस और ‘गुमनामी बाबा की गुथी आज भी अनसुलझी

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Jan 22, 2021

नेताजी सुभाष चंद्र बोस अगस्त 1945 में भले ही एक विमान दुर्घटना में ‘मौत हो गई’ हो लेकिन जो लोग उन पर विश्वास करते हैं, उनके लिए वह अब भी ‘गुमनामी बाबा’ के रूप में जीवित रहे।
गुमनामी बाबा, जिनके बारे में कई लोगों का मानना है कि वह वास्तव में नेताजी (बोस) थे और उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर साधु की वेश में रहते थे । जिनमें नैमिषारण्य , बस्ती, अयोध्या और फैजाबाद शामिल हैं।

लोगों ने उन्हें कभी नहीं देखा

लोगों का मानना है कि वह ज्यादातर शहर के भीतर ही अपना निवास स्थान बदलता रहते थे। उन्होंने कभी अपने घर से बाहर कदम नहीं रखा बल्कि कमरे में केवल अपने कुछ विश्वासियों से मुलाकात की और अधिकांश लोगों ने उन्हें कभी नहीं देखने का दावा किया।
एक जमींदार, गुरबक्स सिंह सोढ़ी ने उनके मामले को दो बार फैजाबाद के सिविल कोर्ट में ले जाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। यह जानकारी उनके बेटे मंजीत सिंह ने गुमनामी बाबा की पहचान करने के लिए गठित जस्टिस सहाय कमीशन ऑफ इंक्वायरी को दिए अपने बयान में दी। बाद में एक पत्रकार वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

बोस की विमान दुर्घटना में ‘मौत हो गई’  
गुमनामी बाबा आखिरकार 1983 में फैजाबाद में राम भवन के एक आउट-हाउस में बस गए जहां कथित तौर पर 16 सितंबर 1985 को उनका निधन हो गया और 18 सितंबर को दो दिन बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अगर यह वास्तव में नेताजी थे  तो वे 88 वर्ष के थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अगस्त 1945 में भले ही एक विमान दुर्घटना में ‘मौत हो गई’ हो, लेकिन जो लोग उन पर विश्वास करते हैं। उनके लिए वह अब भी ‘गुमनामी बाबा’ के रूप में जीवित रहे। गुमनामी बाबा  जिनके बारे में कई लोगों का मानना है कि वह वास्तव में नेताजी थे।

‘गुमनामी बाबा’ नेताजी नहीं थे
नेताजी के परिवार की कुछ वस्तुओं की पहचान बाबा के कमरे में  की गई 25 स्टील ट्रंक में 2,000 से अधिक लेखों का संग्रह था। उनके जीवनकाल में इसे किसी ने नहीं देखा था। यह उन्हें मानने वाले लोगों के लिए बहुत कम मायने रखता है कि जस्टिस मुखर्जी और जस्टिस सहाय की अध्यक्षता में लगातार दो आयोगों ने घोषणा की थी कि ‘गुमनामी बाबा’ नेताजी नहीं थे।