Sep 19, 2021
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने एक बार फिर भारत का मान बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने उन्हें अपना सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) एडवोकेट बनाया है। एसडीजी एडवोकेट के रूप में सत्यार्थी संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्य को सन 2030 तक हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सत्यार्थी की बाल दासता को समाप्त करने और बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकारों के लिए वैश्विक आंदोलन के निर्माण में अग्रणी भूमिका रही है। उन्होंने बच्चों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करने और एक ऐसी दुनिया के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है, जहां हर बच्चे को स्वतंत्र, स्वस्थ, शिक्षित और सुरक्षित जीवन जीने का प्राकृतिक अधिकार हासिल हो सके। इस खांटी भारतीय के प्रायस से ही बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून यानी आईएलओ कन्वेंशन-182 पारित हुआ। उनके इन योगदानों को देखते हुए उन्हें एसडीजी एडवोकेट बनाया गया है।
बाल श्रमिकों की संख्या हुई16 करोड़
कैलाश सत्यार्थी की “एसडीजी एडवोकेट” के रूप में नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब एक तरफ बाल श्रम उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय वर्ष चल रहा है वहीं, दूसरी तरफ पूरी दुनिया को दो दशकों में पहली बार बाल श्रम में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। बाल श्रमिकों की संख्या अब बढ़कर 16 करोड़ हो गई है। पहले यह संख्या तकरीबन 15.2 करोड़ थी। वहीं, कोविड-19 के दुष्परिणामों ने लाखों बच्चों को खतरे में डाल दिया है। जबकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने सतत विकास लक्ष्य के एजेंडे में सन 2025 तक समूचे विश्वभर से बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। ऐसे में 2025 तक दुनिया से बाल श्रम को खत्म करने के संकल्प पर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा होता है और संयुक्त राष्ट्र ने 2030 ने सतत विकास लक्ष्य हासिल करने की जो प्रतिबद्धता जताई है, वह भी चुनौतीपूर्ण लग रही है।
करीब 40 साल से बच्चों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं कैलाश सत्यार्थी
कैलाश सत्यार्थी देश में जन्में ऐसे पहले खांटी भारतीय हैं जिन्हें दुनिया के सर्वोच्च नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वे चार दशकों से वैश्विक स्तर पर बच्चों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अपने संगठन बचपन बचाओ आंदोलन के माध्यम से उन्होंने एक लाख से अधिक बच्चों को बाल श्रम, दासता, ट्रैफिकिंग और अन्य प्रकार के शोषण से मुक्त कराया है। उनके नेतृत्व में 1998 में बाल श्रम के खिलाफ आयोजित ऐतिहासिक वैश्विक यात्रा “ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर” ने 103 देशों से गुजरते हुए अपार समर्थन और सहयोग प्राप्त किया था। जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के बाल श्रम के बदतर प्रकारों को खत्म करने के लिए आईएलओ कन्वेंशन 182 को पारित किया था।
बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून
यह 2020 में आईएलओ के इतिहास में एकमात्र सार्वभौमिक रूप से समर्थन वाला कन्वेंशन बन गया, जब इसके सभी 187 सदस्य देशों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए। एक तरह से बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून है। कैलाश सत्यार्थी दुनियाभर में शिक्षा का अधिकार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संगठन ग्लोबल कैंपेन फॉर एजूकेशन के संस्थापक और अध्यक्ष रहे हैं। वे यूनेस्को के शिक्षा पर बनी हाईलेबल कमेटी के सदस्य भी रहे हैं। सत्यार्थी कोरोना संकट में दिए गए आर्थिक अनुदानों में बच्चों को उचित हिस्सा मिले इसके लिए नोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं को एकजुट कर “फेयर शेयर फॉर चिल्ड्रेन” नामक अभियान चला रहे हैं। वे दुनियाभर में “हंड्रेड मिलियन फॉर हंड्रेड मिलियन” कैंपेन भी चला रहे हैं। जिसके तहत दुनिया के हंड्रेड मिलियन यानी 10 करोड़ वंचित और गरीब बच्चों की मदद के लिए 10 करोड़ युवाओं को तैयार किया जा रहा है।








