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तो इसलिए खाई जाती है मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी

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Jan 13, 2021

मकर संक्रान्ति भारत में  प्रमुख पर्व के रुप में मनाया जाता है।  मकर संक्रांति  पूरे भारत और नेपाल में अलग –अलग रूप में मनाया जाता है । पौष मास में सूर्य मकर राशि पर आता है तब  इस पर्व को मनाया जाता है।  यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही आता है । इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति पर हर जगह एक अलग परंपरा में मनाया जाता है । इस त्योहार में कही खिचड़ी खाई जाती है तो कहीं तिल गुड़ खाया जाता है । इस दिन स्नान, दान-पुण्य भी किया जाता है ।

 

मकर संक्रांति के दिन  लगता है खिचड़ी मेला 

कहा जाता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था।  इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते थे और कमजोर हो रहे थे।  इस समस्या का हल निकालने के लिए बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था । इससे शरीर को तुरंत उर्जा मिलती थी।  नाथ योगियों को यह व्यंजन काफी पसंद आया। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा। इसी कारण   गोरखपुर स्थिति बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी मेला आरंभ हुआ । कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और इसे भी प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है।