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अभी-अभी:

प्रदूषण का स्तर कम करने के सारे प्रयास विफल

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Sep 17, 2021

ग्वालियर शहर में स्थानीय प्रशासन के लाख प्रयास के बाद भी प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदूषण को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी ग्रांट और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों पर कांग्रेस ने सवालिया निशान खड़े किए हैं। वही बीजेपी की तरफ से सांसद द्वारा निगम का बचाव किया है। दरअसल शहर की आबोहवा बेहतर हो। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा एयर क्लीनिंग स्कीम के तहत दो साल से ग्वालियर जिले को 51 करोड़ प्रति साल देने का काम किया है, दो किस्ते ग्वालियर निगम के खाते में आ भी गई हैं।

पाल्यूशन पर पॉलिटिक्स

क्लीनिंग स्कीम के तहत 5 साल तक ग्वालियर को प्रदूषण कम करने के लिए ग्रांट मिलना है। लेकिन इसको लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि यह ग्रांट केवल बंदरबांट करने के लिए आई है। जमीनी धरातल पर इसका कोई उपयोग होता नजर नहीं आ रहा है। ग्वालियर में बढ़ते प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कांग्रेस ने निगम के मिसमैनेजमेंट को माना है। कभी स्मार्ट सिटी, कभी अमृत योजना के तहत सड़के खोद दी जाती हैं। वहीं बीजेपी ने निगम का बचाव करते हुए कहा है कि निगम को योजना के तहत जो ग्रांट मिली है। उसका उपयोग प्रदूषण कम करने के लिए किया जा रहा है। कुछ मशीनें निगम के द्वारा खरीदी गई हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण का लेवल मापने के लिए भी दो जगह मॉनिटरिंग मीटर भी लगाए गए हैं।

योजनाएं केवल कागज पर

गौरतलब है कि दो साल पहले से निगम को पैसा मिलना शुरू हुआ है। अगर वर्तमान प्रयासों की बात करें तो जीवाजी यूनिवर्सिटी और फूलबाग पर मॉनिटरिंग सेटअप लगाया गया है। ताकि किस तरह का प्रदूषण है इसका पता लगाता जा सके और उसके बाद उसका हल किया जा सके। इसके साथ ही निगम ने कुछ दिन पहले ही धूल के कण को दबाने के लिए वाटर स्प्रे और सड़क पर जो धूल जमा होती है। उसे हटाने के लिए डस्ट कलेक्शन मशीन भी खरीदी है, लेकिन अधिकांश सड़कें खुदी होने के चलते इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि पीएम 10 का लेवल जो कि 100 के नीचे होना चाहिए। वह ग्वालियर में हमेशा 100 से 200 के बीच में रहता है और कई बार तो यह ढाई सौ तक पहुंच जाता है, इसके साथ ही पीएम 2.5 जो कि वाहन से निकलने वाले के चलते होता है। इसका भी लेवल हमेशा बढ़ा रहता है।