Jan 4, 2026
परिवार से शुरू हो लव जिहाद की रोकथाम: मोहन भागवत का सशक्त संदेश
भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने समाज को एक गहन चिंतन का अवसर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लव जिहाद जैसी चुनौतियों का मुकाबला सबसे पहले घर की मजबूत नींव से करना होगा। परिवार में खुला संवाद और महिलाओं की सशक्तिकरण ही समाज की असली रक्षा है। स्त्री शक्ति संवाद और सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में भागवत ने हिंदू समाज की एकता, विविधता और सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर देते हुए सभी को जागृत होने का आह्वान किया।
महिलाएं: समाज की मजबूत धुरी
डॉ. भागवत ने महिलाओं को भारतीय संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उनके अनुसार, धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के संस्कारों और सुरक्षा पर टिकी है। परिवार में संवाद की कमी से युवतियां बाहरी प्रभाव में आ सकती हैं, इसलिए घर से ही सतर्कता शुरू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घर तक सीमित रखने का समय बीत चुका है; उन्हें सशक्त बनाकर समाज में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
लव जिहाद पर तीन स्तरों की रणनीति
संघ प्रमुख ने लव जिहाद रोकने के लिए तीन स्पष्ट स्तर सुझाए:
परिवार स्तर: निरंतर बातचीत, एक-दूसरे की समस्याओं को समझना और संकट के साथ-साथ सामान्य समय में भी सहयोग।
महिला सशक्तिकरण: युवतियों में जागरूकता जगाना और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना।
सामाजिक स्तर: संस्थाओं की सतर्कता, समय पर सूचना और सामूहिक प्रतिकार। समाज मूकदर्शक न बने, बल्कि सक्रिय हो।
विविधता में एकता: हिंदू समाज का स्वभाव
भागवत ने हिंदू समाज को विविधताओं में एकता का अनुपम उदाहरण बताया। जाति व्यवस्था को शरीर के अंगों से जोड़कर समझाया कि सभी वर्ग मिलकर कार्य करें तो समाज मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों का डीएनए एक है और समाज को तोड़ने वाली विचारधाराओं से सावधान रहना जरूरी है। सद्भावना ही समाज को जोड़े रखती है, कानून नहीं।
यह संदेश न केवल परिवारों को मजबूत बनाने का आह्वान है, बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।








