Jan 4, 2026
बस्तर में सुरक्षा बलों का जोरदार प्रहार: बीजापुर में दो इनामी माओवादी ढेर, संगठन को लगा तगड़ा झटका
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को नई गति मिली है। बीजापुर जिले के घने जंगलों में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) की टीम ने माओवादियों से हुई भीषण गोलीबारी में दो कुख्यात उग्रवादियों को मार गिराया। दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम था, जिससे संगठन की कमर टूटने की कगार पर पहुंच गई है।
मुठभेड़ की पूरी कहानी
बीजापुर के बासागुड़ा थाना क्षेत्र में गगनपल्ली-मुरकीपार के जंगलों में शनिवार सुबह करीब पांच बजे से रुक-रुक कर फायरिंग शुरू हुई। खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए सर्च अभियान के दौरान डीआरजी जवानों और माओवादियों के बीच आमना-सामना हो गया। लंबी गोलीबारी के बाद इलाके की तलाशी में दो माओवादियों के शव मिले। उनकी पहचान एरिया कमेटी सदस्य हुंगा मड़काम उर्फ पंचुगा और पीपुल्स प्रोटेक्शन कमेटी सदस्य आयती मुचाकी उर्फ जोगी के रूप में हुई। दोनों पर राज्य सरकार ने पांच लाख रुपये का इनाम रखा था।
मौके से एक एसएलआर राइफल, 12 बोर की देशी कट्टा, विस्फोटक सामग्री, कॉर्डेक्स वायर और माओवादी दस्तावेज बरामद हुए। यह सफलता बस्तर आईजी की अगुवाई में चल रहे बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें सुकमा और बीजापुर में कुल 14 माओवादी मारे गए।
माओवादी संगठन पर दोहरा संकट
इसी बीच तेलंगाना में माओवादियों को एक और बड़ा झटका लगा। पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के बटालियन कमांडर बारसे देवा उर्फ सुक्का ने अपने दर्जनों साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें तेलंगाना स्टेट कमेटी के वरिष्ठ नेता कंकनाला राजी रेड्डी उर्फ वेंकटेश भी शामिल हैं। सरेंडर करने वालों ने 48 हथियार सौंपे, जिनमें एलएमजी, एके-47, इंसास राइफलें और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद था। पुलिस ने इसे संगठन के सैन्य ढांचे के अंत की शुरुआत बताया। सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत सहायता मिलेगी।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है। सुरक्षा बलों की रणनीति और सरेंडर की बढ़ती संख्या से माओवादी प्रभाव क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा है।








