Feb 23, 2023
सिवनी मालवा के वन परिक्षेत्र बानापुरा में सैंकड़ों आदिवासी जमीन के पट्टे नहीं मिलने खासा नाराज हैं... उन्होंने जंगल के हरे भरे पेड़ों को काटकर खेत बनाना शुरू कर दिया... इधर, अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर अदिवासियों को समझाइस दी... मगर आदिवासी अधिकारियों की एक भी नहीं सुने... वहीं ग्रामीणों ने कहा कि वे कई सालों से जमीन जोत रहे थे... जिसके चलते वे जमीन छोड़ने से मना कर दिया... जिसके बाद आदिवासियों को मौके से भगाने का प्रयास किया... मगर आदिवासियों ने पेड़ काटना जारी रखा...
सिवनी मालवा तहसील के वन परिक्षेत्र बानापुरा के अंतर्गत आने वाले वन ग्राम राजलढाना में सैंकड़ों आदिवासियों ने जमीन के पट्टे नहीं मिलने से नाराज होकर वन भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ काटकर खेत बनाना शुरू कर दिया। अधिकारीयों ने मौके पर पहुंच आदिवासियों को समझाईस दी परन्तु बह नहीं माने।
ग्रामीणों ने कहा हमको जमीन चाहिए हम सालों से जमीन जोत रहे थे। हम जमीन नहीं छोड़ेंगे हमने कोदो कुटकी बोई थी और सरकार ने 2018 में हम से जमीन छीन लिया ट्रैक्टर चलाकर रोपे लगा दिए और उनका रोपा भी नहीं पनपा जो रोपे लगे हैं वह तो ऑटोमेटिक भगवान के दिए हुए हैं उन्होंने जो रोपे लगाया था वह आज तक नहीं पनपा। हम जमीन नहीं छोड़ेंगे चाहे हमें गोली मार दो या जहर दे दो हम पेट के लिए लड़ रहे हैं।
राजलढाना में सैंकड़ों आदिवासी महिलाओं पुरषों युवाओं ग्रामीणों ने हाथ मे कुल्हाड़ी लेकर वन भूमि पर खड़े छोटे बड़े हजारों हरे-भरे पेड़ काट दिए। दो दिनों से चल रही पेड़ कटने की सूचना मिलने पर वन अधिकारी व कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर आदिवासियों को मौके से भगाने का प्रयास किया परन्तु उन्होंने कर्मचारियों की बात नहीं सुनी और सब वन विभाग के अधिकारी कर्मचारीयों के सामने पेड़ों की कटाई होते रही और अधिकारी कर्मचारी खड़े-खड़े पेड़ कटते देखते रहे।
ज्ञात हो कि वन विभाग के द्वारा सन 2016 में 120 हेक्टेयर जमीन पर ओषधी के पौधों का प्लांटेशन किया गया था जिनमें महुआ, बहेड़ा, कहू सहित अन्य पौधे लगाए गए थे जिसमें से लगभग 7 हेक्टेयर जमीन पर आदिवासियों के द्वारा पेड़ो को काट दिया गया साथ ही आदिवासियों के द्वारा उस स्थान पर एक बैनर भी लगाया गया जिसमे लिखा था "जो जमीन सरकारी है वो जमीन हमारी है, जय उलगुलान जारी है"।
राजलढाना वन भूमि में भीड़ बढ़ती देख वन विभाग के अधिकारीयों ने इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारीयों को दी जिसके बाद उनके द्वारा इसकी सूचना एसडीएम तहसीलदार को दी। जानकारी मिलते ही एसडीएम अनिल जैन, नायब तहसीलदार प्रमेश जैन राजस्व अमले सहित पुलिस बल लेकर घटना स्थल पर पहुंचे परन्तु आदिवासी पेड़ काटते रहे। मौके पर पहुंचे एसडीएम अनिल जैन ने आदिवासियों को एक स्थान पर एकत्रित कर समझाने का प्रयास भी किया उन्होंने सभी से चर्चा कर उन्हें समझाईस देते हुए कहा की इस तरह हरे भरे पेड़ों को काटकर नुकसान करने से कुछ नहीं होगा। पट्टे के लिए आप लोग विधिवत आवेदन करें। जिस पर आदिवासियों के द्वारा मौके पर ही पट्टे का आवेदन एसडीएम अनिल जैन को दिया गया। पूरे मामले में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी मूक दर्शक बने रहे और देखते ही देखते आदिवासियों ने हजारो पेड़ काट दिए हैं।
वन विभाग के अधिकारीयों के अनदेखी और लचर व्यवस्था कार्य के प्रति बहुत ही ढीला रवैया देखते हुए यह कहना मुश्किल है की वन अधिकारी इस क़ीमती अनमोल जंगल को इन आदिवासियों से कब तक बचा पाएंगे।
इस सम्बंध में एसडीएम अनिल जैन ने बताया की वन विभाग के द्वारा हमें सूचना नहीं दी गई थी और वरिष्ठ अधिकारीयों से मिली जानकारी पर बन भूमि पर आकर आदिवासियों को समझाईस दी है की इस तरह से जंगल को काट नुकसान नहीं करें विधिवत आवेदन दें।








