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अंतरिक्ष में वीरता का नया अध्याय: शुभांशु शुक्ला का अशोक चक्र और सितारों को छूता सफर

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Jan 26, 2026

अंतरिक्ष में वीरता का नया अध्याय: शुभांशु शुक्ला का अशोक चक्र और सितारों को छूता सफर

 गणतंत्र दिवस 2026 पर, भारत ने इतिहास रच दिया। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी असाधारण बहादुरी और अंतरिक्ष में मानवीय सीमाओं को विस्तार देने के प्रयासों को समर्पित है। शुक्ला वह पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं, जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला, जो दर्शाता है कि वीरता के लिए नया मैदान अब आकाश से परे है।

 एक ऐतिहासिक सम्मान

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र प्रदान करने की मंजूरी दी। यह घोषणा एक ऐतिहासिक पल थी, क्योंकि शुक्ला भारतीय अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति बन गए। यह पुरस्कार न केवल उनके कौशल को, बल्कि अंतरिक्ष की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक अदम्य साहस को भी मान्यता देता है।

 लखनऊ से सितारों तक का सफर

 शुभांशु शुक्ला की यात्रा लखनऊ में एक सपने देखने वाले युवा के रूप में शुरू हुई। मात्र 17 वर्ष की आयु में, कारगिल युद्ध और वायु सेना के एयरशो से प्रेरित होकर, उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए आवेदन किया। यह निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ और उन्हें सितारों तक पहुंचने के अपने असाधारण मार्ग पर ले गया।

 आकाश से अंतरिक्ष तक: एक दृढ़ निश्चयी पायलट

साल 2006 में एक फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायु सेना में शामिल होने के बाद, शुक्ला ने Su-30MKI, MiG-21 और जैगुआर सहित विभिन्न लड़ाकू विमानों पर 2000 से अधिक घंटे उड़ान भरी। उन्होंने एक टेस्ट पायलट और कॉम्बैट लीडर के रूप में कार्य किया और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री हासिल की, जिससे उनकी तकनीकी विशेषज्ञता मजबूत हुई।

 गगनयान का चयन और अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण

2019 में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए चुने जाने पर शुक्ला के करियर ने एक नया आयाम प्राप्त किया। इस चयन के बाद, उन्होंने रूस के यूरी गगारिन अंतरिक्ष केंद्र में गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया और नासा तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय सत्रों में भाग लिया। वह इस मिशन के लिए चार अंतिम उम्मीदवारों में से एक थे।

 एक राष्ट्रीय प्रेरणा

 राकेश शर्मा के बाद 41 वर्षों के अंतराल को पाटते हुए, शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि लाखों भारतीयों, विशेष रूप से युवाओं के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणा है। उनकी कहानी दृढ़ संकल्प, साहस और देश की सेवा के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। यह अशोक चक्र एक ऐसे अग्रदूत को श्रद्धांजलि है, जिसने यह साबित किया कि भारतीय वीरता अब धरती, आकाश और अंतरिक्ष—हर मोर्चे पर विजय पा रही है।

 

Report By:
Monika