Jan 22, 2026
रामायण संदर्भ और आदिवासी मुद्दा: सिंघार के बयान से सियासत गरम
मध्य प्रदेश के विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार ने एक बार फिर भगवान हनुमान को आदिवासी बताकर विवाद खड़ा कर दिया है। बड़वानी जिले के सेंधवा में आयोजित एक आदिवासी कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि रामायण में वर्णित वानर सेना वास्तव में आदिवासी समुदाय की थी, जिन्होंने भगवान राम को लंका पहुंचाने में मदद की। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का आरोप लगाया तथा आदिवासी संस्कृति की स्वतंत्र पहचान पर जोर दिया। यह उनका दोहराया गया बयान है, जो पहले भी चर्चा में रहा था।
उमंग सिंघार का ताजा बयान और विवाद
सेंधवा में गुरुवार को हुए कार्यक्रम में उमंग सिंघार ने कहा कि भगवान राम की सेना में शामिल वानर सेना आदिवासी समुदाय की थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदिवासियों को वानर कहकर उनकी पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। सिंघार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे हनुमान जी की पतंग उड़ा रहे हैं, यानी आदिवासियों की अनदेखी और उनका शोषण कर रहे हैं। उन्होंने आदिवासियों की मजबूत परंपरा, तीर-कमान की ताकत और आत्मसम्मान पर बल दिया।
आदिवासी संस्कृति और हिंदू पहचान पर जोर
उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी सूरज, गाय और फसल की पूजा करते हैं तथा उनकी अपनी अलग संस्कृति और रीति-रिवाज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो हिंदुस्तान में रहता है, वह हिंदुस्तानी है, लेकिन आदिवासी अपनी अलग पहचान रखते हैं। बीजेपी और आरएसएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे आदिवासियों को हमेशा हिंदू बनाने की कोशिश करते हैं, जबकि आदिवासियों की अपनी स्वतंत्र धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी सम्मान से समझौता नहीं करेंगे और उनकी संस्कृति से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राम की जीत में आदिवासियों की भूमिका
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भगवान राम को मिली जीत आदिवासियों के सहयोग से ही संभव हुई। लंका तक पहुंचाने वाले वानर नहीं, बल्कि जंगलों में रहने वाले आदिवासी थे। सिंघार ने इसे कहानीकारों की गलती बताया कि उन्हें वानर के रूप में चित्रित किया गया। उन्होंने आदिवासियों को कमजोर नहीं माना और कहा कि उनके पास परंपरा, पहचान और संघर्ष की शक्ति है। यह बयान आदिवासी समाज को गर्व महसूस कराने और उनकी अलग पहचान को मजबूत करने का प्रयास था।
पहले भी दिए समान बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया
उमंग सिंघार ने इससे पहले जून 2023 में धार जिले के बाग में भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर भी हनुमान जी को आदिवासी बताया था। तब उन्होंने कहा था कि राम को लंका पहुंचाने वाले आदिवासी थे, लेकिन कहानीकारों ने उन्हें वानर बता दिया। उनका यह दोहराया गया बयान राजनीतिक बहस छेड़ रहा है, जहां एक तरफ आदिवासी पहचान की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लग रहा है। सिंघार का कहना है कि वे आदिवासी समाज की आवाज उठाते रहेंगे।
https://youtu.be/-QxR1IIbLSI?si=HACviuyLdULZ-Yv7







