Jan 26, 2026
लव मैरिज पर पंचायत की ‘सामाजिक सज़ा’, रतलाम के गांव से वायरल वीडियो ने खड़ा किया संवैधानिक सवाल
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के ग्राम पंचेवा की पंचायत का एक फरमान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने चर्चा और चिंता दोनों पैदा की है। इस फरमान के तहत प्रेम विवाह करने वाले युवाओं और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की गई है, जिससे संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक रूढ़ियों के बीच टकराव का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
पंचायत के फरमान का सार
वायरल वीडियो में एक युवक स्पष्ट रूप से घोषणा करता सुनाई देता है कि गाँव में कोई भी लड़का-लड़की यदि परिवार की मर्जी के बिना प्रेम विवाह करता है, तो उन्हें और उनके परिवारों को गाँव से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। इस बहिष्कार में दूध न देना, शुभ कार्यों से बाहर रखना, मजदूरी न देना और सामाजिक तौर पर अलग-थलग करना शामिल है।
ग्रामीणों की दलील और एसपी की प्रतिक्रिया
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि बिना सहमति के विवाह से गाँव का माहौल खराब हो रहा है, जिससे अभिभावक लड़कियों की पढ़ाई रुकवा रहे हैं। उनका तर्क है कि विवाह में माता-पिता की सहमति अनिवार्य होनी चाहिए। हालाँकि, वे अब कह रहे हैं कि बहिष्कार सिर्फ युवा जोड़े तक सीमित रहेगा। वहीं, रतलाम एसपी अमित कुमार ने कहा है कि वायरल वीडियो की जाँच की जाएगी और कानून के दायरे से बाहर जाने वालों पर कार्रवाई होगी।
संवैधानिक अधिकार बनाम सामाजिक दबाव
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर वयस्क नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। सर्वोच्च न्यायालय भी बार-बार इस अधिकार को पुष्ट कर चुका है। ऐसे में, सामूहिक सामाजिक बहिष्कार की धमकी न सिर्�़फ असंवैधानिक है, बल्कि व्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार भी है।







