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दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो : स्वामी विवेकानंद

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Jan 12, 2021

12 जनवरी का दिन  भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप मनाया जाता है । बता दें स्वामी विवेकानंद के सम्मन के उपलक्ष्य युवाओं को प्रेरित करने के लिए मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद प्रेरणास्त्रोत रहे  उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उनका नाम उनके माता-पिता ने उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त रखा था लेकिन उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें  "स्वामी विवेकानंद"  नाम दिया  था । जब पहली बार विवेकानंद रामकृष्ण परमहंस से मिले तब उन्होनें बंद आंखो से बिना देखे कहा “देखो वो आ गया’’ ।

 

“मुझे कोई डर नहीं है”

स्वामी विवेकानंद ने  वेदांत दर्शन का प्रसार पूरी दुनिया में किया गुरु के मार्ग पर चलकर उन्होंने समाज के सेवा कार्य के लिए रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। विवेकानंद ने जिवन को सिर्फ जीना ही उद्देश्य नहीं माना उन्होनें जिवन को समझा उन्होने अपने विचारो से युवाओं का सरल करने की कोशिश की आइए जानते है उनके विचार....

  • "चिंतन करो, चिंता नहीं, नए विचारों को जन्म दो।
  • "जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।"
  • एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
  • उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।
  • दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।
  • एक नायक बनो, और सदैव कहो – “मुझे कोई डर नहीं है”।