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त्रिभंग : बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता

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Jan 16, 2021

हिंदी सिनेमा के सौ साल से अधिक के इतिहास में गिनती की फिल्में बनी हैं जिनमें मां-बेटी के रिश्तें केंद्र में रहे हों।  त्रिभंगः टेढ़ी मेढ़ी क्रेजी तीन पीढ़ियों की मां-बेटी की कहानी है। इस लिहाज से यह खास है अक्सर जिंदगी परिवारों में अपने आप को दोहराती है। वह गुजरती नहीं है डीएनए की तरह सुख-दुख भी मां से बेटी को मिलते हैं। मां ने जो जिंदगी गुजारी, आंसू और मुस्कान के अलग रंग-रोगन के साथ वही बेटी के जीवन के कैनवास पर उभरने लगती हैं निदां फाजली का शेर है। बेनाम सा ये दर्द ठहर क्यों नहीं जाता....जो बीत गया है वो गुजर क्यों नहीं जाता।

रूढ़ियों के खिलाफ उन्होंने बार-बार बगावत 

नेटफ्लिक्स पर आज रिलीज हुई लेखक-निर्देशक रेणुका शहाणे की फिल्म में तीन पीढ़ियों की स्त्रियों का दर्द गुजरता नहीं है। वह ठहरा रहता है। एक से दूसरी के पास पहुंचता है और नया चक्र शुरू होता है। क्या यह टूटेगा या सिर्फ सांसें टूटेंगी  त्रिभंग कोमा में अस्पताल के बिस्तर पर लेटी नयनतारा आप्टे (तन्वी आजमी), बॉलीवुड स्टार और ओडिशी डांसर अनुराधा आप्टे (काजोल) और माशा मेहता (मिथिला पालकर) के रिश्तों की कहानी है।  नयन और अनु ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी है. समाज की मान्यताओं रूढ़ियों के खिलाफ उन्होंने बार-बार बगावत की ।