Jan 3, 2026
लाल आतंक को बड़ा झटका: कुख्यात कमांडर बारसे देवा ने डाले हथियार
हैदराबाद/रायपुर: नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की मुहिम को नई ताकत मिली है। माओवादी संगठन की सबसे खतरनाक सैन्य इकाई पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का ने अपने कई साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों को कमजोर करने वाली बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
सरेंडर की पूरी कहानी
बारसे देवा, जो हाल ही में मारे गए शीर्ष नक्सली नेता माडवी हिडमा का करीबी सहयोगी था, ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक के समक्ष हथियार रखे। उसके साथ 15 से अधिक माओवादी कैडरों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। वे छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा क्षेत्र से सुरक्षित निकलकर हैदराबाद पहुंचे। सरेंडर के दौरान कई हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए। बारसे देवा पर लाखों रुपये का इनाम था और वह कई बड़े हमलों की साजिश रचने में शामिल रहा।
क्यों चुना सरेंडर का रास्ता?
सुरक्षा बलों के लगातार दबाव, एनकाउंटरों में साथियों की मौत और संगठन के अंदर बढ़ते असंतोष ने बारसे देवा को मुख्यधारा में लौटने पर मजबूर किया। हिडमा की मौत के बाद वह बटालियन का प्रमुख कमांडर बन गया था, लेकिन अब उसका यह कदम माओवादी ढांचे को गहरा झटका देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां और कमजोर होंगी।
आगे की राह
तेलंगाना पुलिस सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान करेगी। यह घटना मार्च 2026 तक देश को नक्सल-मुक्त बनाने के सरकारी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सुरक्षा एजेंसियां अब बचे हुए नेताओं पर फोकस बढ़ाएंगी।








